<p style=”text-align: justify;”><strong>TRAI AI Guidelines:</strong> देश के टेलिकॉम सेक्टर में एआई के इस्तेमाल के बीच भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण TRAI ने एक बड़ा फैसला लिया है. TRAI ने साफ कर दिया है कि अगर टेलिकॉम कंपनियों के नेटवर्क या सेवाओं में इस्तेमाल होने वाले एआई सिस्टम के कारण किसी भी ग्राहक को कोई नुकसान या परेशानी होती है, तो उसके लिए सीधे तौर पर टेलिकॉम कंपनियां ही जिम्मेदार होंगी.</p>
<p style=”text-align: justify;”>TRAI ने एआई के सुरक्षित और जिम्मेदारी भरे इस्तेमाल को लेकर नए दिशा-निर्देशों का एक मजबूत ड्राफ्ट फ्रैमवर्क पेश किया है. इस नए नियम के आने के बाद टेलिकॉम कंपनियां एआई की गलतियों या तकनीकी कमियों का ठीकरा किसी दूसरी कंपनी पर फोड़कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकेंगी.</p>
<h3 style=”text-align: justify;”>थर्ड-पार्टी वेंडर से खरीदा हो सॉफ्टवेयर तो भी कंपनी की होगी जवाबदेही</h3>
<p style=”text-align: justify;”>TRAI ने अपने नए नियमों में जवाबदेही को लेकर स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है. आज के समय में रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया जैसी बड़ी कंपनियां अपने नेटवर्क को सुधारने और धोखाधड़ी रोकने के लिए कई तरह के एआई सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर रही हैं.</p>
<p style=”text-align: justify;”>इनमें से कई सिस्टम बाहरी टेक कंपनियों से खरीदे जाते हैं. TRAI के नए नियमों के मुताबिक, एआई सिस्टम चाहे कंपनी ने खुद बनाया हो या किसी बाहरी वेंडर से खरीदा हो, उसके हर नतीजे की जिम्मेदारी मुख्य टेलिकॉम ऑपरेटर की ही होगी. </p>
<h3 style=”text-align: justify;”>लागू होगें एआई के कड़े नियम और जोखिम के आधार पर वर्गीकरण</h3>
<p style=”text-align: justify;”>इस नए फ्रेमवर्क के तहत अब देश की सभी टेलिकॉम कंपनियों को अपने बोर्ड से मंजूर कराई गई एक खास एआई पॉलिसी बनानी होगी. इसके साथ ही कंपनियों को अपने नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले सभी सिस्टम को उनके काम के आधार पर तीन श्रेणियों- हाई रिस्क, मीडियम रिस्क और लो रिस्क में बांटना होगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”>नेटवर्क ट्रैफिक को संभालने वाले बड़े सॉफ्टवेयर हाई रिस्क में आएंगे, क्योंकि उनके गलत फैसले से पूरे इलाके का मोबाइल नेटवर्क बंद हो सकता है. वहीं, सामान्य सवालों के जवाब देने वाले चैटबॉट को कम जोखिम वाली श्रेणी में रखा जा सकता है. </p>
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<h3 style=”text-align: justify;”>गंभीर घटनाओं की रिपोर्ट सीधे TRAI को देना होगा अनिवार्य </h3>
<p style=”text-align: justify;”>TRAI ने यह भी अनिवार्य किया है कि अगर एआई सिस्टम में कोई बड़ी गड़बड़ी या खराबी आती है, तो कंपनियों को एक तय समय के अंदर इसकी पूरी रिपोर्ट सीधे ट्राई को सौंपनी होगी. इसके लिए कंपनियों को अपने यहां एक केंद्रीय डेटाबेस तैयार करना होगा, जिसमें एआई से जुड़ी सभी गड़बड़ियों और ग्राहकों की शिकायतों का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”>साथ ही, हर कंपनी में एक विशेष एआई गवर्नेंस एंड सेफ्टी कमेटी का गठन किया जाएगा, जिसके अधिकारी इन एआई सिस्टम पर लगातार नजर रखेंगे और किसी भी गलत फैसले की स्थिति में इंसानी दखल के जरिए उसे तुरंत ठीक करेंगे. ट्राई के इस कड़े कदम से आने वाले समय में करोड़ों मोबाइल ग्राहकों के हितों और उनके डेटा की सुरक्षा और मजबूत हो जाएगी.</p>
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