<p style=”text-align: justify;”>चक्रवात ‘मुरासु’ का असर अब कम होने लगा है. आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद यह कमजोर पड़ रहा है, लेकिन पीछे भारी बारिश, उखड़े पेड़ और बिजली के खंभों की तबाही छोड़ गया है. एक हफ्ते के अंदर यह दूसरा तूफान था यानी पहले ‘अर्नब’ और अब ‘मुरासु’.</p>
<p style=”text-align: justify;”><em><strong>तो क्या 2026 खत्म होने से पहले भारत को और तूफान झेलने पड़ेंगे और सर्दियों की ठिठुरन पर इसका कितना असर पड़ेगा…</strong></em></p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>अर्नब, मुरासु… और कितने बाकी?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के मुताबिक, 2026 में अब तक सिर्फ दो सिस्टम ही ‘साइक्लोनिक स्टॉर्म’ के लेवल तक पहुंच पाए हैं. अक्टूबर 2026 के आखिर में अर्नब और नवंबर 2026 की शुरुआत में मुरासु. यानी, तूफानों के नामों की लिस्ट में कई नाम बचे हैं, लेकिन हर नाम का इस्तेमाल तभी होता है जब कोई सिस्टम पहले ‘साइक्लोनिक स्टॉर्म’ बने. यानी हवा की रफ्तार 62 किमी प्रति घंटा से ज्यादा होनी चाहिए.</p>
<p style=”text-align: justify;”>’मुरासु’ के बाद लिस्ट में अगला नाम ‘अकवान’ है, जो ईरान ने दिया है. इसके बाद ‘कानी’ मालदीव से, फिर ‘नगामान’ म्यांमार से आएगा. लेकिन सवाल यह है कि क्या दिसंबर तक ये नाम इस्तेमाल होंगे?</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>दिसंबर तक कितने और तूफान आ सकते हैं?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>यहां एक जरूरी बात समझिए कि नामों की लिस्ट कोई ‘शेड्यूल’ नहीं है. IMD हर साल औसतन 4-5 साइक्लोन की बात करता है, जिसमें से 3-4 अक्टूबर से दिसंबर के बीच बनते हैं. इस साल एक बड़ा फैक्टर काम कर रहा है- मजबूत एल नीनो. IMD के मुताबिक, एल नीनो की वजह से इस साल बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में सिस्टम कम बन रहे हैं और उनकी ट्रैक भी छोटी रह रही है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>इस वजह से पूरे सीजन यानी दिसंबर तक एक-दो और सिस्टम बन सकते हैं, लेकिन यह गारंटी नहीं है कि वे सभी साइक्लोन बनेंगे. कुछ सिर्फ ‘डिप्रेशन’ या ‘डीप डिप्रेशन’ तक सीमित रह सकते हैं. यानी, लिस्ट में नाम बहुत हैं, लेकिन इस साल के आखिर तक शायद ही कोई और बड़ा तूफान भारत की मुख्यभूमि से टकराए.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>सर्दियों की ठिठुरन पर क्या असर?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>तूफान सिर्फ तटीय इलाकों तक सीमित नहीं रहता, वह हवा के पैटर्न को बदलकर सर्दियों की शुरुआत को भी प्रभावित करता है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>IMD ने साफ कहा है कि ‘मुरासु’ के असर से पश्चिम बंगाल में सर्दी की शुरुआत में देरी हो रही है. कोलकाता समेत राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है. हालांकि, राहत की बात यह है कि 5 नवंबर से मौसम सुधरने लगेगा और 8 नवंबर से पहले तापमान में गिरावट आ सकती है, यानी ठंड का अहसास बढ़ेगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”>दिल्ली, पंजाब, हरियाणा जैसे इलाकों में ‘मुरासु’ का सीधा असर नहीं दिख रहा है. यहां मौसम शुष्क और ठंडी सुबह वाला बना हुआ है. यानी, उत्तर भारत की ठंड पर इस तूफान का कोई खास असर नहीं पड़ेगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>अब तक कहां-कहां हुआ असर?</strong></p>
<ul style=”text-align: justify;”>
<li><strong>अर्नब (28 अक्टूबर):</strong> आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में भारी बारिश और तूफानी हवाएं चलीं. इसकी नमी उत्तर भारत तक पहुंची और दिल्ली-NCR, यूपी, बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ समेत 10 राज्यों में बारिश हुई और पारा गिरा.</li>
<li><strong>मुरासु (3 नवंबर):</strong> आंध्र प्रदेश के नेल्लोर और नरसापुर के बीच लैंडफॉल हुआ. इसके असर से आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, तेलंगाना, ओडिशा, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और महाराष्ट्र तक बारिश हुई. पश्चिम बंगाल में सर्दी में देरी हुई.</li>
</ul>
<p style=”text-align: justify;”><strong>तो फिर असर कहां-कहां दिखेगा?</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>जहां ‘मुरासु’ ने दस्तक दी, वहां भारी बारिश और तेज हवाओं के बाद अचानक ठंड बढ़ सकती है. आंध्र प्रदेश (तटीय इलाके), ओडिशा (दक्षिणी जिले), तमिलनाडु (उत्तरी हिस्से) और छत्तीसगढ़-मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश के बाद तापमान गिर सकता है. यह गिरावट लंबे समय तक नहीं रहेगी, तूफान के जाने के बाद <a title=”मौसम” href=”https://www.abplive.com/weather” data-type=”interlinkingkeywords”>मौसम</a> धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगा.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>कम तूफान, लेकिन खतरा कम नहीं</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>2026 का सीजन अब तक ‘कम सिस्टम, ज्यादा तीव्रता’ वाला रहा है. अर्नब बहुत गंभीर तूफान था और मुरासु भी कम नहीं रहा. नामों की लिस्ट में कई नाम बचे हैं, लेकिन एल नीनो की वजह से दिसंबर तक शायद ही कोई बड़ा तूफान आए. सर्दियों पर असर मुख्य पश्चिम बंगाल में देरी के रूप में दिखा, जो नवंबर की शुरुआत में ही ठीक हो जाएगा. बाकी भारत में ठंड अपने सामान्य रास्ते पर है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>इस पूरी कहानी का सबक यही है कि तूफानों की संख्या कम होना खतरे को कम नहीं करता. जब भी कोई सिस्टम बनता है, वह पहले से ज्यादा तीव्र हो सकता है. इस वजह से तटीय इलाकों में रहने वालों को हर अपडेट पर नजर रखनी चाहिए, चाहे लिस्ट में कितने भी नाम बचे हों.</p>