<p style=”text-align: justify;”>कर्नाटक में स्टिंग ऑपरेशन का विवाद गहराता जा रहा है. इसकी आंच केंद्रीय मंत्री और JDS नेता एचडी कुमारस्वामी तक पहुंच गई है. केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार पर उन्हें फंसाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है. कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने उन्हें पूर्व सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ हुए कथित स्टिंग ऑपरेशन में फंसाने की साजिश रची है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>उन्होंने दावा किया कि जांच का रुख जानबूझकर JD(S) की तरफ मोड़ा जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भले ही आरोपियों ने कथित तौर पर स्टिंग ऑपरेशन करने की बात कबूल कर ली है, फिर भी राज्य सरकार मेरे खिलाफ शक पैदा करने की कोशिश कर रही है. कुमारस्वामी ने पत्रकारों से कहा, “हम इससे डरते नहीं हैं. हमारी पार्टी में इसका सामना करने की ताकत है.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कुमारस्वामी पर AICC अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और सिद्धारमैया के खिलाफ गंदी राजनीति करने का आरोप लगाते हुए मंत्री ने कहा कि जांच अभी खत्म नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि यह तो बस ट्रेलर है, अभी पूरी फिल्म आनी बाकी है.</p>
<p style=”text-align: justify;”><strong>स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तारी</strong></p>
<p style=”text-align: justify;”>मामले को लेकर बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने रविवार (1 नवंबर 2026) को बयान दिया. उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को निशाना बनाकर स्टिंग ऑपरेशन को अंजाम दिया गया था. इसमें इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन दिल्ली में खरीदा गया था. कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि मोबाइल फोन को दिल्ली में कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर प्रज्वल प्रसाद नाम के एक व्यक्ति को सौंपा गया था.</p>
<p style=”text-align: justify;”>कमिश्नर ने इस मामले में गिरफ्तार आरोपी रितेश पांडे के बयान का हवाला देते हुए बताया कि यह फोन प्रज्वल प्रसाद के निर्देश पर सौंपा गया था. दिल्ली के रहने वाले रितेश पांडे को 24 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था. उस पर सोशल मीडिया पर कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो अपलोड करने का आरोप है. </p>
<p style=”text-align: justify;”>रितेश पांडे स्टिंग ऑपरेशन मामले में गिरफ्तार होने वाला पहला व्यक्ति था. बेंगलुरु पुलिस की सेंट्रल क्राइम ब्रांच (CCB) ने उसे दिल्ली से पकड़ा और पूछताछ के लिए बेंगलुरु ले आई. बताया जा रहा है कि सितंबर में यूट्यूब पर दो वीडियो अपलोड किए गए थे, जिनमें सिद्धारमैया के खिलाफ गंभीर आरोप लगाए गए थे.</p>
<p style=”text-align: justify;”>सीमांत कुमार सिंह के मुताबिक प्रज्वल प्रसाद के कहने पर विनोद शर्मा और रितेश पांडे ने करोल बाग की एक दुकान से मोबाइल फोन खरीदा. बाद में उन्होंने दिल्ली में कुमारस्वामी के सरकारी आवास पर यह फोन प्रज्वल प्रसाद को दे दिया.</p>
<p style=”text-align: justify;”>पुलिस का दावा है कि ये तीनों कुमारस्वामी के ऑफिस में काम करते थे. जब सीमांत से पूछा गया कि क्या कुमारस्वामी को कोई नोटिस भेजा गया है या क्या इस कथित ऑपरेशन में उनकी सीधी संलिप्तता साबित हो गई है. इस पर सिंह ने कहा कि जांच अभी चल रही है और किसी नतीजे पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी.</p>
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